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मंत्रSavitri (Surya)Surya

गायत्री मंत्र (व्याहृतियों सहित)

ऋग्वेद ३.६२.१० का पूर्ण गायत्री मंत्र — ॐ और तीन व्याहृतियों (भूः भुवः स्वः) सहित। ज्ञान, स्पष्टता और आध्यात्मिक प्रकाश के लिए सर्वोच्च 24-अक्षर वैदिक मंत्र। दैनिक संध्या और [सूर्य उपासना](/hi/blog/what-is-saturn-in-vedic-astrology) के लिए आदर्श।

गायत्री मंत्र (व्याहृतियों सहित)

चौपाई vyahritis

ॐ भूर्भुवः स्वः

Om Bhur Bhuvah Svah

ॐ — ब्रह्म का मूल ध्वनि। भूः — पृथ्वी लोक (भौतिक क्षेत्र)। भुवः — अंतरिक्ष लोक (मानसिक और प्राण क्षेत्र)। स्वः — स्वर्ग लोक (आनंद का दिव्य क्षेत्र)। ये तीन महाव्याहृतियाँ मूल मंत्र से पहले तीन लोकों का आह्वान करती हैं।

चौपाई 1

तत्सवितुर्वरेण्यं

Tat Savitur Varenyam

सवितुः (दिव्य सूर्य, समस्त जीवन और ज्ञान के स्रोत) की वह पूज्य प्रभा।

चौपाई 2

भर्गो देवस्य धीमहि

Bhargo Devasya Dhimahi

हम उस देवता के दिव्य प्रकाश (भर्ग) का ध्यान करते हैं।

चौपाई 3

धियो यो नः प्रचोदयात्

Dhiyo Yo Nah Prachodayat

वह हमारी बुद्धि (धियः) को धर्ममार्ग की ओर प्रेरित और प्रकाशित करे।

गायत्री मंत्र के बारे में

गायत्री मंत्र हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो देवी गायत्री / सविता (दिव्य सूर्य) को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • सूर्य ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को सूर्य महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • मन को शुद्ध कर बुद्धि तीक्ष्ण करता है — सभी वैदिक उपायों की नींव
  • तीनों लोकों (भौतिक, मानसिक, आध्यात्मिक) में सविता की प्रभा का आह्वान
  • दैनिक आध्यात्मिक अनुशासन के लिए संध्या (प्रभात, मध्याह्न, सायं) में पारंपरिक पाठ
  • सूर्य महादशा में स्पष्टता और कुंडली में कमज़ोर सूर्य को मजबूत करता है

शुभ समय और विधि

प्रतिदिन 108 बार ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले), मध्याह्न संध्या, या सायं संध्या में पढ़ें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। ॐ, तीन व्याहृतियाँ, फिर 24-अक्षर गायत्री। स्फटिक या तुलसी की माला उपयोग करें।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

गायत्री को वेद माता कहा जाता है। ग्रह दशाओं और दैनिक साधना के संबंध के लिए विंशोत्तरी दशा देखें। मजबूत सूर्य आत्मविश्वास देता है; शनि उपाय के साथ गायत्री जप सौर ऊर्जा को संतुलित करने का शास्त्रीय उपाय है।

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