सरस्वती चालीसा
रामसागर रचित सरस्वती चालीसा विद्या, वाणी और कला की देवी को समर्पित है। वैदिक ज्योतिष में सरस्वती पूजन बुध ग्रह को बल देकर शिक्षा और बुद्धि में सफलता दिलाता है।

दोहा
जनक जननि पद्मरज निज मस्तक पर धरि ॥
Janak Janani Padmaraj | Nij Mastak Par Dhari ||
जनक-जननी के चरणरज मस्तक पर धारकर...
दोहा
बन्दौं मातु सरस्वती बुद्धि बल दे दातारि ॥
Bandaun Matu Saraswati | Buddhi Bal De Datari ||
...मातु सरस्वती को नमन, बुद्धि-बल दाता।
दोहा
पूर्ण जगत में व्याप्त तव महिमा अमित अनंतु ॥
Poorn Jagat Mein Vyapt Tav | Mahima Amit Anantu ||
अनंत महिमा संपूर्ण जगत में व्याप्त।
दोहा
रामसागर के पाप को मातु तुही अब हन्तु ॥
Ramsagar Ke Pap Ko | Matu Tuhi Ab Hantu ||
मातु, रामसागर के पाप अब नष्ट करें।
चौपाई 1
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥
Jai Shri Sakal Buddhi Balrasi | Jai Sarvagya Amar Avinashi ||
सकल बुद्धि बलराशि, सर्वज्ञ, अमर अविनाशी की जय।
चौपाई 2
जय जय जय वीणाकर धारी करती सदा सुहंस सवारी ॥
Jai Jai Jai Vinakar Dhari | Karti Sada Suhans Savari ||
वीणाधारिणी, सुहंस सवारी की जय।
चौपाई 3
रूप चतुर्भुजधारी माता सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥
Roop Chaturbhujdhari Mata | Sakal Vishva Andar Vikhyata ||
चतुर्भुज माता, विश्व में विख्यात।
चौपाई 4
जग में पाप बुद्धि जब होती जबहि धर्म की फीकी ज्योती ॥
Jag Mein Pap Buddhi Jab Hoti | Jabahi Dharm Ki Fiki Jyoti ||
पाप बुद्धि उठे, धर्म ज्योति मंद हो।
चौपाई 5
तबहि मातु ले निज अवतारा पाप हीन करती महि तारा ॥
Tabahi Matu Le Nij Avatara | Pap Heen Karti Mahi Tara ||
तब मातु अवतार ले पृथ्वी पापमुक्त करें।
चौपाई 6
बाल्मीकि जी थे हत्यारा तव प्रसाद जानै संसारा ॥
Balmiki Ji The Hatyara | Tav Prasad Janai Sansara ||
बाल्मीकि हत्यारा थे; कृपा से संसार जानता है।
चौपाई 7
रामायण जो रचे बनाई आदि कवी की पदवी पाई ॥
Ramayan Jo Rache Banai | Adi Kavi Ki Padvi Pai ||
रामायण रचकर आदिकवि पद पाए।
चौपाई 8
कालिदास जो भये विख्याता तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥
Kalidas Jo Bhaye Vikhyata | Teri Kripa Drishti Se Mata ||
कालिदास तुम्हारी कृपा दृष्टि से विख्यात हुए।
चौपाई 9
तुलसी सूर आदि विद्धाना भये और जो ज्ञानी नाना ॥
Tulsi Sur Adi Viddhana | Bhaye Aur Jo Gyani Nana ||
तुलसी, सूर आदि अनेक ज्ञानी बने।
चौपाई 10
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा केवल कृपा आपकी अम्बा ॥
Tinhahin Na Aur Raheu Avalamba | Keval Kripa Aapki Amba ||
उनका एकमात्र आधार तुम्हारी कृपा।
चौपाई 11
करहु कृपा सोइ मातु भवानी दुखित दीन निज दासहि जानी ॥
Karahu Kripa Soi Matu Bhavani | Dukhit Deen Nij Dasahi Jani ||
दीन दास जानकर कृपा करें, भवानी।
चौपाई 12
पुत्र करै अपराध बहूता तेहि न धरइ चित सुन्दर माता ॥
Putra Karai Aparadh Bahuta | Tehi Na Dharai Chit Sundar Mata ||
पुत्र अपराध करे, माता चित्त में न धारे।
चौपाई 13
राखु लाज जननी अब मेरी विनय करूं बहु भांति घनेरी ॥
Rakhu Laj Janani Ab Meri | Vinay Karun Bahu Bhanti Ghaneri ||
मेरी लाज रखें; बहु प्रकार विनय करता हूँ।
चौपाई 14
मैं अनाथ तेरी अवलंबा कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥
Main Anath Teri Avalamba | Kripa Karau Jai Jai Jagdamba ||
अनाथ हूँ, तुम्हारी शरण; कृपा करें जगदम्बा।
चौपाई 15
मधु कैटभ जो अति बलवाना बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना ॥
Madhu Kaitabh Jo Ati Balvana | Bahuyuddh Vishnu Te Thana ||
मधु-कैटभ ने विष्णु से बाहुयुद्ध किया।
चौपाई 16
समर हजार पाँच में घोरा फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा ॥
Samar Hajar Panch Mein Ghora | Phir Bhi Mukh Unse Nahin Mora ||
पंद्रह सौ वर्ष युद्ध में विष्णु विजयी न हुए।
चौपाई 17
मातु सहाय कीन्ह तेहि काला बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥
Matu Sahay Kinha Tehi Kala | Buddhi Viparit Bhai Khalhala ||
मातु ने सहाय की; खलों की बुद्धि विपरीत की।
चौपाई 18
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥
Tehi Te Mrityu Bhai Khal Keri | Purvahu Matu Manorath Meri ||
तब खलों की मृत्यु; मेरी मनोकामना पूरी करें।
चौपाई 19
चंड मुण्ड जो थे विख्याता छण महु संहारेउ तेहि माता ॥
Chand Mund Jo The Vikhyata | Chhan Mahu Sanhareu Tehi Mata ||
चंड-मुण्ड क्षण में संहारे।
चौपाई 20
रक्तबीज से समरथ पापी सुरमुनि हृ्दय धरा सब काँपी ॥
Raktabij Se Samarth Papi | Surmuni Hriday Dhara Sab Kapi ||
रक्तबीज से सब काँपे।
चौपाई 21
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा बार बार बिनऊं जगदंबा ॥
Kateu Sir Jim Kadali Khamba | Bar Bar Binaun Jagdamba ||
कदली खंभा सम सिर काटे; बारंबार नमन।
चौपाई 22
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा छिन में वधे ताहि तू अम्बा ॥
Jagprasiddh Jo Shumbhnishumbha | Chhin Mein Vadhe Tahi Tu Amba ||
शुंभ-निशुंभ क्षण में वध किए।
चौपाई 23
भरत मातु बुद्धि फेरेऊ जाई रामचन्द्र बनवास कराई ॥
Bharat Matu Buddhi Phereu Jai | Ramchandra Banvas Karai ||
भरत मातु की बुद्धि फेरकर राम वनवास कराए।
चौपाई 24
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा सुर नर मुनि सबको सुख दीन्हा ॥
Ehividhi Ravan Vadh Tu Kinha | Sur Nar Muni Sabko Sukh Dinha ||
इस प्रकार रावण वध; सबको सुख दिया।
चौपाई 25
को समरथ तव यश गुन गाना निगम अनादि अनंत बखाना ॥
Ko Samarath Tav Yash Gun Gana | Nigam Anadi Anant Bakhana ||
यश गान कौन समर्थ? निगम अनंत बखान।
चौपाई 26
विष्णु रुद्र अज सकहिन मारी जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥
Vishnu Rudra Aj Sakahin Mari | Jinki Ho Tum Rakshakari ||
जिनकी तुम रक्षा करो, उन्हें कोई न मार सके।
चौपाई 27
रक्त दन्तिका और शताक्षी नाम अपार है दानव भक्षी ॥
Rakt Dantika Aur Shatakshi | Nam Apar Hai Danav Bhakshi ||
रक्तदंतीका, शताक्षी — दानव भक्षिणी।
चौपाई 28
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥
Durgam Kaj Dhara Par Kinha | Durga Nam Sakal Jag Linha ||
दुर्गम कार्य किया; जग ने दुर्गा नाम लिया।
चौपाई 29
दुर्ग आदि हरनी तू माता कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥
Durg Adi Harani Tu Mata | Kripa Karahu Jab Jab Sukhdat ||
दुर्ग हारिणी माता; कृपा करें सुखदाता।
चौपाई 30
नृप कोपित जो मारन चाहै कानन में घेरे मृग नाहै ॥
Nrip Kopit Jo Maran Chahai | Kanan Mein Ghere Mrig Nahai ||
कोपित राजा मारना चाहे, वन में घेरा हो।
चौपाई 31
सागर मध्य पोत के भंजे अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥
Sagar Madhya Pot Ke Bhange | Ati Toofan Nahin Kou Sange ||
सागर में जहाज टूटे, तूफान में कोई न हो।
चौपाई 32
भूत प्रेत बाधा या दुख में हो दरिद्र अथवा संकट में ॥
Bhoot Pret Badha Ya Dukh Mein Ho | Daridra Athava Sankat Mein ||
भूत-प्रेत, दुःख, दरिद्रता या संकट में।
चौपाई 33
नाम जपे मंगल सब होई संशय इसमें करे ना कोई ॥
Nam Jape Mangal Sab Hoi | Sanshay Ismein Kare Na Koi ||
नाम जप से सब मंगल; संशय न करें।
चौपाई 34
पुत्रहीन जो आतुर भाई सब छाडि पूजे यही माई ॥
Putraheen Jo Aatur Bhai | Sab Chhadi Puje Yahi Mai ||
पुत्रहीन आतुर भक्त इस माई की पूजा करे।
चौपाई 35
करै पाठ नित यह चालीसा होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥
Karai Path Nit Yah Chalisa | Hoy Putra Sundar Gun Eesa ||
नित्य पाठ से सुंदर गुणी पुत्र मिले।
चौपाई 36
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै संकट रहित अवश्य हो जावै ॥
Dhoopadik Naivedya Chadhave | Sankat Rahit Avashya Ho Javai ||
धूप-नैवेद्य चढ़ाने से संकट मुक्ति।
चौपाई 37
भक्ति मातुकी करै हमेशा निकट न आवै ताहि कलेशा ॥
Bhakti Matu Ki Karai Hamesha | Nikat Na Avai Tahi Kalesha ||
मातु भक्ति सदा करे — कलेश निकट न आए।
चौपाई 38
बंदी पाठ करै शतवारा बंदी पाश दूर हो सारा ॥
Bandi Path Karai Shatvara | Bandi Pash Door Ho Sara ||
शत बार पाठ से बंदी पाश दूर।
चौपाई 39
राम सागर बाँधि हेतु भवानी कीजै कृपा दास निज जानी ॥
Ram Sagar Bandhi Hetu Bhavani | Kijai Kripa Das Nij Jani ||
रामसागर संकट में; दास जानकर कृपा करें।
दोहा
मातु सूर्य कान्ति तव अन्धकार मम रूप ॥
Matu Surya Kanti Tav | Andhkar Mam Roop ||
तुम्हारी कांति सूर्य सम; मैं अंधकार।
दोहा
डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप ॥
Dooban Se Raksha Karahu | Parun Na Main Bhav Koop ||
डूबने से बचाएँ; भवकूप में न गिरूँ।
दोहा
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि सुनहु सरस्वती मातु ॥
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi | Sunahu Saraswati Matu ||
बल, बुद्धि, विद्या दें, सरस्वती मातु।
दोहा
राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु ॥
Ram Sagar Adham Ko | Aashray Tu Hi Dedatu ||
अधम रामसागर को आश्रय दें।
सरस्वती चालीसा के बारे में
सरस्वती चालीसा हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो माँ सरस्वती को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
- बुध ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को बुध महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।
पाठ के लाभ
- शिक्षा, परीक्षा और अध्ययन में सफलता
- कमजोर बुध, बुध महादशा में राहत
- वाणी, स्मृति और कला में वृद्धि
- अज्ञान और मानसिक भ्रम का नाश
शुभ समय और विधि
बसंत पंचमी, बुधवार, गुरुवार या पढ़ाई से पूर्व पाठ करें। पूर्व मुख कर श्वेत पुष्प, चंदन और पीला प्रसाद अर्पित करें।
ज्योतिषीय महत्व
नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।