स्तोत्र और चालीसा पर वापस जाएं
चालीसाBudhBudh

बुध चालीसा

बुध चालीसा बुध देव (बुध ग्रह) को समर्पित भक्ति पाठ है। बुधवार, बुध महादशा या पीड़ित बुध में पाठ करने से वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, वाणी और व्यापार सफलता मिलती है।

बुध चालीसा

दोहा

नमो नमो जय श्री बुध राजा। करहुं कृपा मोहि जानि कायर अधम का॥ करहुं कृपा कृपानिधि बुध सदा सहाय। रोग दोष दुख हरो अनाथ के नाथ॥

Namo Namo Jai Shri Budh Raja | Karahu Kripa Mohi Jaani Kayar Adham Ka || Karahu Kripa Kripanidhi Budh Sada Sahay | Rog Dosh Dukh Haro Anath Ke Naath ||

नमो नमो श्री बुध राजा; कायर अधम जान कृपा करो। कृपानिधि बुध सदा सहाय, रोग-दोष-दुख हरो अनाथ के नाथ।

चौपाई 1

जयति जयति बुध देव दयाला। सदा करत जो सुकृत प्रतिपाला॥

Jayati Jayati Budh Dev Dayala | Sada Karat Jo Sukrit Pratipala ||

दयालु बुध देव की जय जो सुकृतियों की सदा रक्षा करते हैं।

चौपाई 2

जटा मुकुट सिर शोभित भारी। त्रिपुण्ड चंदन रेखा प्यारी॥

Jata Mukut Sir Shobhit Bhari | Tripund Chandan Rekha Pyari ||

जटा मुकुट सिर शोभित भारी; त्रिपुंड चंदन रेखा प्यारी।

चौपाई 3

गरल कनठ सर्प जग माला। नाग कंकन कर मंडित भाला॥

Garal Kanath Sarp Jag Mala | Naag Kankan Kar Mandit Bhala ||

गरल कंठ, सर्प जग माला; नाग कंकन कर मंडित भाला।

चौपाई 4

ब्रह्म रूप वर शुभ्र सरीरा। करत सदा जन कल्याण अधीरा॥

Brahm Roop Var Shubhra Shirera | Karat Sada Jan Kalyan Adheera ||

ब्रह्म रूप वर शुभ्र शरीर; सदा जन कल्याण अधीरा।

चौपाई 5

श्वेत कमल आसन मन भावा। संत करत सदा मंगल ध्यावा॥

Shwet Kamal Aasan Man Bhava | Sant Karat Sada Mangal Dhyava ||

श्वेत कमल आसन मन भावा; संत सदा मंगल ध्यावा।

चौपाई 6

कुंजल बिराजत छवि नयनी। अति मनोहर मंगल गुन खानी॥

Kunjal Birajat Chhavi Nayani | Ati Manohar Mangal Gun Khani ||

कुंजल बिराजत छवि नयनी; अति मनोहर मंगल गुण खानी।

चौपाई 7

काटत पातक पंक भरारा। बुध ग्रह दुष्ट नरक सँसारा॥

Katat Paatak Pank Bharara | Budh Grah Dusht Narak Sansara ||

पातक पंक काटत; बुध ग्रह दुष्ट को नरक संसार से बचाते।

चौपाई 8

सुख सृखावत सब फल साता। रोग दोष संकट हरण विधाता॥

Sukh Srikhavat Sab Phal Saata | Rog Dosh Sankat Haran Vidhata ||

सुख सृजावत सब फल दाता; रोग-दोष-संकट हरण विधाता।

चौपाई 9

बुध की महिमा अपरंपारा। किया जानि मनुज दुख निवारा॥

Budh Ki Mahima Aparampara | Kiya Jaani Manuj Dukh Nivara ||

बुध की महिमा अपरंपारा; जानकर मनुज दुख निवारा।

चौपाई 10

लाख के वचन धरत दर साता। रोग हरण बुध दया विहाता॥

Laakh Ke Vachan Dharat Dar Saata | Rog Haran Budh Daya Vihata ||

लाख के वचन धरत; रोग हरण बुध दया विहाता।

चौपाई 11

ग्रह अनिष्ट जो नर पर छाए। रोग दोष भय मिटै नहिं जाऐ॥

Grah Anisht Jo Nar Par Chhaaye | Rog Dosh Bhay Mitai Nahin Jaai ||

ग्रह अनिष्ट नर पर छाए तो रोग-दोष-भय मिटै नहीं जाता।

चौपाई 12

तिन्ह पर बुद्ध अनुग्रह होई। काटि दै सब संकट मोहे॥

Tinh Par Buddh Anugrah Hoi | Kati Dai Sab Sankat Mohe ||

तिन्ह पर बुध अनुग्रह होई; सब संकट काट दे।

चौपाई 13

जनम जनम के पातक भारी। काटि दै सब बुध मति तारी॥

Janam Janam Ke Paatak Bhari | Kati Dai Sab Budh Mati Taari ||

जन्म-जन्म के पातक भारी; बुध सब काट मति तारी।

चौपाई 14

सुर नर मुनि नित्य गुण गावे। यश गावत बुध सुख पावे॥

Sur Nar Muni Nitya Gun Gaave | Yash Gavat Budh Sukh Paave ||

सुर-नर-मुनि नित्य गुण गावे; यश गाते बुध सुख पावे।

चौपाई 15

रोग दोष संकट सब हारी। धरहुं धीर बुध हरहु पाप भारी॥

Rog Dosh Sankat Sab Haari | Dharahu Dheer Budh Harahu Paap Bhari ||

रोग-दोष-संकट सब हारी; धीर बुध पाप भारी हरो।

चौपाई 16

नित नव मंगल करत सवारी। रोग दोष बुध हरहु भारी॥

Nit Nav Mangal Karat Savaari | Rog Dosh Budh Harahu Bhari ||

नित नव मंगल सवारी; रोग-दोष बुध भारी हरो।

चौपाई 17

अधम कायर मतिहीन हमारा। करहुं कृपा बुध हरो दुख सारा॥

Adham Kayar Matiheen Hamara | Karahu Kripa Budh Haro Dukh Sara ||

अधम कायर मतिहीन हमारा; कृपा करो बुध दुख सारा हरो।

चौपाई 18

सुख संपत्ति दै करहुं उपाई। जन मन रंजन मंगल लाई॥

Sukh Sampatti Dai Karahu Upai | Jan Man Ranjan Mangal Lai ||

सुख-संपत्ति दे उपाई करो; जन मन रंजन मंगल लाई।

चौपाई 19

बुध सुधी सील रूप सुहावा। संत ध्यावत मंगल भावा॥

Budh Sudhi Seel Roop Suhava | Sant Dhyavat Mangal Bhava ||

बुध सुधी-शील-रूप सुहावा; संत मंगल भाव ध्यावत।

चौपाई 20

विनय करौं बुध देव तुम्हारी। संकट हरो हे पातक भारी॥

Vinay Karaun Budh Dev Tumhari | Sankat Haro He Paatak Bhari ||

विनय करूँ बुध देव तुम्हारी; संकट हरो हे पातक भारी।

चौपाई 21

अधम कायर सुबुद्धि सुधारा। करहुं कृपा हरो दुख सारा॥

Adham Kayar Subuddhi Sudhara | Karahu Kripa Haro Dukh Sara ||

अधम कायर सुबुद्धि सुधारो; कृपा करो दुख सारा हरो।

चौपाई 22

महा संकट में तिन्हें उबारो। अधम कायर सुबुद्धि सुधारो॥

Maha Sankat Mein Tinhen Ubaro | Adham Kayar Subuddhi Sudharo ||

महा संकट में उबारो; अधम कायर सुबुद्धि सुधारो।

चौपाई 23

हरहुं पाप बुध महा विधाता। सुर नर मुनि सदा शुभ गाता॥

Harahu Paap Budh Maha Vidhata | Sur Nar Muni Sada Shubh Gata ||

पाप हरो महा विधाता बुध; सुर-नर-मुनि सदा शुभ गाता।

चौपाई 24

बुध की महिमा अपार पावे। अधम कायर सब संकट हरे॥

Budh Ki Mahima Apaar Paave | Adham Kayar Sab Sankat Hare ||

बुध की अपार महिमा पावे; अधम कायर सब संकट हरे।

चौपाई 25

जयति जयति बुध देव सहाय। कृपा करहुं हरहुं सब भय॥

Jayati Jayati Budh Dev Sahay | Kripa Karahu Harahu Sab Bhay ||

सहाय बुध देव की जय; कृपा करो, सब भय हरो।

दोहा

नमो नमो जय बुध सुख कारी। दुख दारिद्र्य मिटाओ भारी॥ यह चालीसा बुध ग्रह का पाठ। करहुं कृपा बुध हरो सब कष्ट॥

Namo Namo Jai Budh Sukh Kaari | Dukh Daridrya Mitaao Bhaari || Yah Chalisa Budh Grah Ka Paath | Karahu Kripa Budh Haro Sab Kasht ||

नमो नमो जय बुध सुखकारी; दुख-दारिद्र्य भारी मिटाओ। यह बुध ग्रह चालीसा पाठ — कृपा करो बुध, सब कष्ट हरो।

बुध चालीसा के बारे में

बुध चालीसा हिंदू परंपरा का अत्यंत पवित्र स्तोत्र है, जो बुध देव को समर्पित है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को दिव्य कृपा, मानसिक स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है।

  • बुध ग्रह उपाय: वैदिक ज्योतिष में इस पाठ को बुध महादशा, अंतर्दशा या कठिन गोचर के दौरान ग्रह ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सुझाया जाता है।

पाठ के लाभ

  • कुंडली में कमजोर या पीड़ित बुध को मजबूत करता है
  • बुद्धि, वाणी, शिक्षा और व्यापार कौशल बढ़ाता है
  • बुध दोष और संवाद-करियर की बाधाएँ दूर करता है
  • बुधवार को हरे पुष्प और मूंग दाल अर्पण के साथ पारंपरिक पाठ

शुभ समय और विधि

बुधवार (बुध का दिन) को प्रातः पाठ करें। हरे पुष्प, मूंग दाल अर्पित करें और घी का दीप जलाएँ। बुध महादशा में नियमित बुधवार पाठ विशेष शुभ है।

ज्योतिषीय महत्व

नियमित पाठ मन को धार्मिक अनुशासन से जोड़ता है — जो सभी वैदिक उपायों की नींव है। भय के बजाय ईमानदार आचरण, सेवा और निरंतरता के साथ इसका अभ्यास करें।

संबंधित स्तोत्र और पाठ

अगला कदम

इसे अपनी कुंडली पर लागू करें